पुस्तक समीक्षा

पुस्तक समीक्षा – माटी की महक से सराबोर लघुकथाएंँ

कथा साहित्य में लघुकथा अपना विशिष्ट मौलिक स्थान बना चुकी है। यही कारण है कि विभिन्न भाषाओं के बाद बोलियों में भी लघुकथा पर निरंतर कार्य हो रहा है। राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं से लेकर स्थानीय अखबारों में भी गागर में सागर भरी लघुकथाओं ने अपनी विशिष्ट जगह बना ली है। विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं में लघुकथा विशेषांक, लघुकथाओं पर शोधकार्य, लघुकथा को लेकर निरंतर नवाचारी सृजन व नए प्रयोग सामने आते रहे हैं। इसी कड़ी में प्रखर प्रयोगधर्मी वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामनिवास ‘मानव’ के
मार्गदर्शन में हरियाणवी लघुकथाओं का संग्रह ‘म्हारी माट्टी,म्हारे आखर’ हरियाणवी माँ-बोली एवं लघुकथा के क्षेत्र में नवाचारी प्रयोग सामने आया है, जिसमें बहुआयामी सृजनशीलता की निरंतरता से जुड़े दिव्य दम्पति डॉ. सत्यवान सौरभ तथा डॉ. प्रियंका सौरभ के क्रमशः कुशल संपादन व सजग संकलन में तैंतीस रचनाकारों की तीन-तीन लघुकथाओं को स्थान दिया गया है। लोक संस्कृति, लोकजीवन तथा लोक मूल्यों के साथ मानवीय मूल्यों पर केंद्रित इस संग्रह को माटी की महक से सराबोर जीवंत दस्तावेज़ कहा जा सकता है।
कुछ स्थापित तथा अधिकांश नवोदित रचनाकारों के इस लघुकथा संग्रह में विषय-विविधता के साथ जहां सामाजिक विसंगतियों तथा सामाजिक विद्रुपताओं पर करारे कटाक्ष हैं,तो सूक्ष्म मानवीय संवेदनाओं का मार्मिक वर्णन भी है। कहीं सामाजिक दोगलेपन को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है, तो कहीं सामाजिक अवमूल्यन के मुंँह बोलते शब्दचित्र हैं। संग्रह की सभी लघुकथाओं में लेखकीय दायित्वबोध भी उभरकर सामने आया है। कुछ लघुकथाओं को छोड़कर अधिकांश रचनाओं में लघुकथा के मूलतत्त्व विद्यमान हैं। कुछ रचनाओं की भाषायी भावभूमि देखकर स्पष्ट होता है कि उन्हें हिंदी से हरियाणवी में अनुवाद करने की असफल कोशिश की गई है, क्योंकि ठेठ हरियाणवी में लिखी गई लघुकथाओं की तो ठसक ही ‘नियारी’ होती है।
संग्रह का शीर्षक ‘म्हारी माट्टी म्हारे आखर’ की बजाय म्हारी माट्टी,म्हारे आक्खर’ होता तो बेहतर होता। इसी प्रकार अनेक लघुकथाओं में भी हरियाणवी वर्तनी की अशुद्धियांँ अखरती हैं।
संग्रह में सभी लघुकथाकारों का एकरूपता के साथ संक्षिप्त परिचय, बेहद कलात्मक आकर्षक आवरण, सुंदर छपाई इसकी अतिरिक्त विशेषताएं कही जा सकती हैं। यह संग्रह हरियाणवी मांँ-बोली के संरक्षण के साथ लघुकथा साहित्य को समृद्ध करते हुए हरियाणवी बोली को भाषा बनाए जाने के महायज्ञ में एक प्रेरक आहुति का कार्य करेगा-ऐसा विश्वास है।

पुस्तक : म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’
संपादक : डॉ. सत्यवान सौरभ
प्रकाशक : प्रज्ञानशाला, आरके फीचर्स, भिवानी
पृष्ठ : 275 मूल्य : 120 रुपए

— सत्यवीर नाहड़िया

*डॉ. सत्यवान सौरभ

✍ सत्यवान सौरभ, जन्म वर्ष- 1989 सम्प्रति: वेटरनरी इंस्पेक्टर, हरियाणा सरकार ईमेल: satywanverma333@gmail.com सम्पर्क: परी वाटिका, कौशल्या भवन , बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045 मोबाइल :9466526148,01255281381 *अंग्रेजी एवं हिंदी दोनों भाषाओँ में समान्तर लेखन....जन्म वर्ष- 1989 प्रकाशित पुस्तकें: यादें 2005 काव्य संग्रह ( मात्र 16 साल की उम्र में कक्षा 11th में पढ़ते हुए लिखा ), तितली है खामोश दोहा संग्रह प्रकाशनाधीन प्रकाशन- देश-विदेश की एक हज़ार से ज्यादा पत्र-पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशन ! प्रसारण: आकाशवाणी हिसार, रोहतक एवं कुरुक्षेत्र से , दूरदर्शन हिसार, चंडीगढ़ एवं जनता टीवी हरियाणा से समय-समय पर संपादन: प्रयास पाक्षिक सम्मान/ अवार्ड: 1 सर्वश्रेष्ठ निबंध लेखन पुरस्कार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी 2004 2 हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड काव्य प्रतियोगिता प्रोत्साहन पुरस्कार 2005 3 अखिल भारतीय प्रजापति सभा पुरस्कार नागौर राजस्थान 2006 4 प्रेरणा पुरस्कार हिसार हरियाणा 2006 5 साहित्य साधक इलाहाबाद उत्तर प्रदेश 2007 6 राष्ट्र भाषा रत्न कप्तानगंज उत्तरप्रदेश 2008 7 अखिल भारतीय साहित्य परिषद पुरस्कार भिवानी हरियाणा 2015 8 आईपीएस मनुमुक्त मानव पुरस्कार 2019 9 इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ रिसर्च एंड रिव्यु में शोध आलेख प्रकाशित, डॉ कुसुम जैन ने सौरभ के लिखे ग्राम्य संस्कृति के आलेखों को बनाया आधार 2020 10 पिछले 20 सालों से सामाजिक कार्यों और जागरूकता से जुडी कई संस्थाओं और संगठनों में अलग-अलग पदों पर सेवा रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, दिल्ली यूनिवर्सिटी, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 9466526148 (वार्ता) (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) 333,Pari Vatika, Kaushalya Bhawan, Barwa, Hisar-Bhiwani (Haryana)-127045 Contact- 9466526148, 01255281381 facebook - https://www.facebook.com/saty.verma333 twitter- https://twitter.com/SatyawanSaurabh

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