कविता

छठ माँ की आराधना

सूरज निकला सुनहरी रोशनी में,
जल में चमके उसकी निर्मल धारा।
धरती ने ओढ़ी पूजा की चादर,
हर घाट बना भक्ति का सहारा।

व्रती खड़ी है जल के भीतर,
चेहरे पर श्रद्धा की उज्जवल लहर।
मन में सच्ची आस्था जागे,
हर दिल में है भक्ति का असर।

घाटों पर गूंजे मीठे गीत,
“छठी मईया, सुख दे हर प्रीत।”
बूढ़े, बच्चे, नारी, नर सब एक,
संग भरे हैं पूजा की अनुपम रीत।

ठेकुआ की खुशबू, गन्ने की छाँव,
दीपक में जलता जीवन का भाव।
सूरज की किरणें जब जल को छूएं,
हर दिल में अनोखा उजियारा आए।

ढलते सूरज को अर्घ्य दिया,
शाम हुई तो घाट झिलमिलाया।
उगते सूरज को भी अर्घ्य दिया,
नया सवेरा सुख संदेश लाया।

यह पर्व नहीं बस उपवास का,
ये तो सच्चा प्रकृति प्यार का।
छठ हमें सिखाता है यही,
मनुष्य और प्रकृति एक ही कही।

— रूपेश कुमार

रूपेश कुमार

भौतिक विज्ञान छात्र एव युवा साहित्यकार जन्म - 10/05/1991 शिक्षा - स्नाकोतर भौतिकी , इसाई धर्म(डीपलोमा) , ए.डी.सी.ए (कम्युटर),बी.एड(फिजिकल साइंस) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी ! प्रकाशित पुस्तक ~ *"मेरी कलम रो रही है", "कैसें बताऊँ तुझे", "मेरा भी आसमान नीला होगा", "मैं सड़क का खिलाड़ी हूँ" *(एकल संग्रह) एव अनेकों साझा संग्रह, एक अंग्रेजी मे ! विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओ मे सैकड़ो से अधिक कविता,कहानी,गजल प्रकाशित ! राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थानों से सैकड़ो से अधिक सम्मान प्राप्त ! सदस्य ~ भारतीय ज्ञानपीठ (आजीवन सदस्य) पता ~ ग्राम ~ चैनपुर  पोस्ट -चैनपुर, जिला - सीवान  पिन - 841203 (बिहार) What apps ~ 9934963293 E-mail - - rupeshkumar01991@gmail.com