दोहावली
सेवा से सार्थक करे, करुणा दया विधान।
मानवता खिलती जहाँ, साथ रहे भगवान।।
सत्कर्मो की रोशनी, जीव दया का भान।
धर्म कर्म हो सादगी, कण-कण में भगवान।।
सत्य शील संयम जहाँ, रमते हैं भगवान।
भाव भक्ति कर अर्चना, प्रभु देते वरदान।।
मातु-पिता गुरू का करें, हम आदर सम्मान।
शुभचिंतक वे सर्वदा, भर-भर देते ज्ञान।।
