ग़ज़ल
तुमको अपने पास लिखा है
जीवन का उल्लास लिखा है ।
वीरानी में भी तो हमने
जीवन का मधुमास लिखा है।
सुख – दुःख तो आते-जाते हैं
किस-किस को संत्रास लिखा है।
खेल लिया है अपना नाटक,
जीवन में परिहास लिखा है।
सूरज की किरणों संग रोशन,
अंधियारों का ह्रास लिखा है।
कठिन समय है संघर्षों का,
किसको भोग-विलास लिखा है।
बुझती नहीं कभी जीवन में,
पानी जितनी प्यास लिखा है।
— वाई. वेद प्रकाश
