गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

प्यार से देखा न कर
तू मुझे रुसवा न कर
में तेरी कुछ भी नहीं
तू मुझे सोचा न कर
जिसकी हो ताबीर गुम
ख़्वाब वो देखा न कर
नींद है नेमत बड़ी
रात भर जागा न कर
जो तुझे हासिल न हो
उसकी तू इच्छा न कर
एक दर का हो के रह
दर बदर भटका न कर
इंतजार उसका है तो
यूं घड़ी देखा न कर
देख “नमिता” रो के यूं
चश्म को दरिया न कर

— नमिता राकेश

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