कविता

एक दीप मन के नाम

विधा- कविता
शीर्षक- एक दीप मन के नाम

दिवाली पर हम रोशन करते हैं
अपने घरों को,
लगाते हैं बालकनी में
झालरों को,
बंदनवारों को,
सजाते हैं रंगोली से
अपने आँगन को,
बाँटते हैं खुशियाँ
अपनों के बीच,
क्या हमने अपने मन के लिए,
कोई दीप जलाया?
मन के भीतर छिपे
अँधेरों को मिटाया?
इस बार क्यों न एक दीप
अपने मन के नाम भी जलाएँ,
जो
मन के भीतर छिपे
अँधेरों को मिटाए,
बीती बातों की
कड़वाहट को दूर करे,
रिश्तों में प्रेम, विश्वास
और अपनापन जगाए,
दूसरों के जीवन में
उजाला करने के लिए
सबसे पहले अपने भीतर
रोशनी होना ज़रूरी है।

इस दिवाली
एक दीप उम्मीद का,
एक दीप क्षमा का,
एक दीप संवेदना का
एक दीप उन सपनों के नाम,
जिन्हें हमने कहीं पीछे छोड़ दिया है।

केवल घर ही नहीं,
अपने मन को भी रोशन करें
क्योंकि
भीतर का अँधेरा मिटना
और मन प्रेम के प्रकाश से भर उठना ही
असली दिवाली होती है।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

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