मायाजाल
सियासत में बेठे , शतरंज खेल रहे लोग मोहरो की तरह एक दूसरे को पीट रहे लोग ! दरन्दगी की
Read Moreकितने शब्द बिखरे पड़े चारो और …. लेकिन सब उलझे हुऐ, किसी शब्द का अर्थ नहीं , तो कही किसी
Read Moreकिताबों की खामोश चीख सुनी है कभी उसमें बसे किरदारों की आवाज सुनी है कभी हर किरदार तड़पता है —बंद
Read Moreअपनी उम्र के कुछ बूढ़े — पक्के बाल से , कमर झुकी सी , शब्द कंपकपाते हुऐ से , इस
Read Moreये लो आज वो फिर पिट गयी रोटी शायद कही से जल गयी ! मार खा कर भी दूसरी रोटी
Read Moreप्रथम प्रेम — आह्ह कैसा मीठा सा शब्द है , जो शहद की तरह घुल जाता है | जो दिलो
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