मन्नत
आफिस से घर आने की जल्दी में मन्नत ने शोर मचा रखा था…प्रियंका जल्दी चल, आज मुझे लड़के वाले देखने
Read Moreव्यंग्य कविता। बात होती जब वतन की वो सवाल करते हैं। खामोशी से कभी आंखों से कमाल करते हैं। तुम
Read Moreसही को सही और ग़लत को ग़लत कहना है मुझे। ग़लत होते देख के यूं खामोश नहीं रहना है मुझे।
Read Moreसिसक रहे हम छुप छुप कर मगर तुम्हें कहें कैसे। जो अभाव रहा उम्रभर वो सफ़र तुम्हें कहें कैसे। तुम
Read Moreमां सुन सुन के ये समाचार मुझे डर लगता है, तुम हो मेरे पास फिर भी मुझे डर लगता है।
Read Moreतिरंगे को उठाया है तो तुम इसका सम्मान भी करना। दिल में कुछ होंठों पे कुछ हो ऐसा कोई काम
Read Moreकभी -कभी करता है मन। त्याग के सब उधेड़-बुन। करूं कुछ बातें तुमसे मैं; और कुछ तुम कहो साजन। मन
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