कबीर
दूजा नहीं कबीर जगत में पर, उससे बेहतर लाखों हैं,समाज सुधारक समय समय पर, आते जाते लाखों हैं।सीधी सच्ची कड़वी
Read Moreकिस बात की बधाई, किस बात का है जश्न,उत्सव भी यह विदेशी, सर्दी का बढा सितम।पीकर शराब रात को, सडको
Read Moreडिग्रियां तो बहुत ली मैंने, अब सम्बन्धों का गणित पढ़ने का प्रयास जारी हैं।जीत कर हार जाना, खोकर पा जाना,
Read Moreपीते जो एक घाट पर, शेर और बकरी पानी,बकरी खा लेती घास, शेर की जान थी जानी।भूखा रहकर कैसे रहता,
Read Moreजिन गलियों में बचपन बीता, उनकी बात निराली है,लुकाछिपी आइस पाइस, खेलों की बात निराली है।सारा गाँव था एक हवेली,
Read Moreसजल नेत्र क्यों ग़ज़ल आज खड़ी हुयी है,उर्दू पर इतराती, हिन्दी पर झिझक रही है?रंग रूप इश्क़ कसीदे, महफ़िल रहने
Read Moreवह करता है अक्सरदेह से देह तक की यात्राबिना उसकी मर्जी केऔर शायद बलात्कार भीउसकी आत्मा का,जिसे समझता है वहअपना
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