पुरूष मन
मैंअहम् के पालने मेंपला बढ़ापुरुष हूँ।हाँयह सच है किअहम्मेरी कमजोरी हैजरूरत नहीं।सच है किमेरे भीतर भीकोमल हृदय हैमगरयह भी सच
Read Moreभुला दिये घर बार गाँव के, शहर चले आये,तन्हा छोडा आंगन, उसमें पीपल ऊग आये।पूछ रही दीवारें, दरवाजे भी अलख
Read Moreविवाह एक सामाजिक बंधन है। जिसका निर्वहन मर्यादा में रहकर किया जाना चाहिए। मर्यादा दोनों पक्षों की होती है। अगर
Read Moreयह सर्वविदित है कि भारत त्योहारों का देश है। भारत भूमि पर 36 करोड़ देवी देवता निवास करते हैं। इसीलिए
Read Moreबुजुर्ग हमारे घर के रक्षक, बुजुर्ग संस्कृति के संरक्षक,दया धर्म का पाठ पढ़ाते, बिछुडों से भी मेल कराते।प्रीत,धर्म और ज्ञान
Read Moreकिस क़दर टूटा हूँ, तुमको क्या बताऊँ,जिस्म छलनी छलनी, तुमको कैसे बताऊँ? जबसे दी तुमने क़सम भूलने की,और दिया था
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