समाज
सम की भाव पर चलता और चलता आज पर, आकंठ न डूबा रहे किसी दकियानूसी रिवाज़ पर, साथ चलना ही
Read Moreबहुत ही व्यथित हूं परेशान हूं, किसी के दर्द से अनजान हूं, ये नौकरी ये चाकरी मुझे बांध के रख
Read Moreये मत कहना कि मजबूरी है, जीवन में रिश्ते जरूरी है, तू तू मैं मैं होना, एक दूसरे से नाराज
Read Moreसंविधान आप हो मेरे लिए अकूत ताकत का खजाना, हर कोई चाहता है खुद को अनुच्छेद रूपी शस्त्रों से सजाना,
Read Moreमानाकि हम दुनिया में जीने आए हैं, जिंदगी का हर रस पीने आए हैं, पर हम भूल क्यों जाते हैं,
Read Moreजा रहा हूं देखने अथाह दर्द का समंदर, इन्हीं आंखों के सामने होगा हर मंजर, आशंका तनिक नहीं है कुछ
Read Moreकौन है लाश, क्यों मौन है लाश, क्यों नहीं रहा अब नैतिकता में विश्वास, जिंदगियां क्यों खो रही उजास, कह
Read Moreहर जीव की एक दुनिया होती है, पर मानवों की दुनिया कई होते हैं, कुछ लोग सारी जिंदगी हंसते हैं
Read Moreजरा बता तो दो ऐ ताक़त क्या तुम्हें इस वतन में मजलूम नहीं चाहिए, गरीब लाचार नहीं चाहिए, यदि हां
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