जगह का मेल
उनका जहां गत बरसहो चुका था बरबाद, साल भर बीता—मिट्टी में मिलने को भीन मिला कोई ठिकाना याद। ताउम्र जिसे
Read Moreउनका जहां गत बरसहो चुका था बरबाद, साल भर बीता—मिट्टी में मिलने को भीन मिला कोई ठिकाना याद। ताउम्र जिसे
Read Moreये हवा ये पानी,ये धूप ये जंगल पहाड़,नहीं कह सकते इसे मुफ्त का,हर जीव हर इंसान कोये प्रकृति की देन
Read Moreअडिग रहो तुम,भीड़ की दिशा नहीं विचारों की दिशा चुनो,जहाँ सच कठिन हो,वहीं अपने कदमों का संकल्प बुनो,क्यों भटकते हो
Read Moreफर्राटे भरती कार, बाइक, ट्रक,हर ओर बिखरी है आपाधापी,होड़ है आगे निकल जाने की,आगे वालों को भी पछाड़ आने की।
Read Moreबैठे बैठे हम यूं ही सबको कोसते हैं,चलो कुछ न करने का बहाना खोजते हैं,अपने मन को अपनों के लिएहम
Read Moreजीना है चैन से तो मिलजुलकर रहो,गर पता हो राज की कोई बात तोइशारों में भी न बताओ मुंह सिलकर
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