आरक्षण – नीति, यथार्थ और सामाजिक न्याय की चुनौतियाँ
भारत में ‘आरक्षण’ केवल एक नीति नहीं, बल्कि सामाजिक असमानता को पाटने और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का एक सशक्त माध्यम
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Read Moreराजनीति को किसी भी लोकतांत्रिक देश की आत्मा माना जाता है। अरस्तू से लेकर चाणक्य तक, सभी विचारकों ने राजनीति
Read Moreतोड़े हैं गलतफहमियों ने मेरे सारे रिश्ते,जिन्हें मैं समझता था फरिश्ते,अब पता नहीं उन सबकोखुन्नस किस बात की थी,शायद कभी
Read Moreगद्दी पर जो बैठा है,वो केवल एक मुखौटा है,असली खेल तो कहीं दूर,उस तोते ने ही ओटा है,किस्सों का जादूगर
Read Moreमैं कहीं जा रहा था,रास्ते में एक जगह रुका।तभी एक बुढ़ऊ मुझसे टकराया,सत्ताधारी नेता का गुणगान सुनाया। बोला—“सच्चा नेता वही
Read Moreयह गंध बड़ी ही न्यारी है,नेताओं को लगती प्यारी है,चमचों की टोली डोल रही,हर गली सुगंधी घोल रही,यह गंध नहीं
Read Moreउस दिन के काम सेफुर्सत हो जैसे ही मैं घर आया,तुरंत गली के एक कुत्ते से टकराया,वो भौंकता हुआ मेरे
Read Moreएम.ए,बी.टेक पास खड़े हैं,लेकर हाथ में झारा,नौकरी की उम्मीद में देखो, चमक रहा सितारा,कल तक जो कोडिंग की भाषा,रटते थे
Read Moreपैदा होते ही आँखों पर, एक चश्मा चढ़ाया जाता है,इंसाँ को इंसान नहीं, बस नाम-गोत्र सिखाया जाता है।वो चश्मा जो
Read Moreहृदयहीनलोग नहीं होते,पूरा गाँव नहीं होता। ये तो होते हैं कुछ चालाक,मतलबपरस्त,राजनीति के धूर्त,जो अपनी खोपड़ी की योजनाओंको देना चाहते
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