धारे के राही
बहे जा रहे हैं धारा के संग,अपनी ही मस्ती, अपने ही रंग।भूल गए हैं यह सरल-सी बात—इन राहों में हैं
Read Moreबहे जा रहे हैं धारा के संग,अपनी ही मस्ती, अपने ही रंग।भूल गए हैं यह सरल-सी बात—इन राहों में हैं
Read Moreकुछ लोग भाईचारा बोने में माहिर होते हैं,और उसी भाई को चारे में बदल देते हैं। एक दिन उन्होंने मेरे
Read Moreमुझे देखना था—आग कहीं एक ही ओर तो नहीं,या फिर दूसरी दिशा भीउतनी ही तपिश से दहक रही है;क्योंकि आग
Read Moreहाँ, मान लिया—कहा जाता है कि अब समाप्त हो चुका जातिवाद,पर जब कोई फरियादीइंसाफ़ की आस लिएदरवाज़ा खटखटाता है,तब उसी
Read Moreउनकी एक चूककिसी के लिए पहाड़ बन जाती है,और निर्दोष भीअपना ही चेहरा छुपाता है। क्यों नहीं समझते कुछ लोगदूसरे
Read Moreवो न चाहे करना इकरार,उन्हें करने दो इंकार,इससे कोई फर्क नहीं पड़ता,नाम सुन उनका मन मस्तिष्क उखड़ता,ये आम बात है,कारण
Read Moreसोच रखा है लिखूंगा तुम्हारे लिएचंद महत्वपूर्ण पंक्तियां,मगर उबर लेने दो मुझेमेरी कुछ परेशान करती उलझनों से, अभी तामील कर
Read Moreसुना है, अक्षरों से तुम्हारा नाता है,पर शब्दों में पाखंड का अंधियारा छाता है,ऐ मित्र, मुखौटों की भीड़ में मत
Read Moreआज भरोसा उन पे करो जो दुश्मन है,जान का खतरा उनसे है जो जीवन है,दुश्मन तो सदा सावधान ही रखता
Read Moreहां हूं बड़ा भाई सब कुछ सहूंगा,निकाल दोगे घर से अकेला रहूंगा,नहीं भूला हूं बचपन तुझे गोद उठाया हूं,जब भी
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