ओढ़ ली खामोशी मैंने
ओढ़ ली खामोशी मैंने,किसी हथियार के रूप में नहीं,बस अपने बचाव के लिए,महसूस हो रहे दुराव के लिए, करता रहा
Read Moreओढ़ ली खामोशी मैंने,किसी हथियार के रूप में नहीं,बस अपने बचाव के लिए,महसूस हो रहे दुराव के लिए, करता रहा
Read Moreगरीबी की भी जाति होती है साहब,वर्ना कम से कम गरीब लोग तोकायम कर लेते रोटी बेटी का रिश्ता,तब नहीं
Read Moreजंग जारी है…अंग्रेजों के चले जाने से हीखत्म नहीं हो जातीआजादी की लड़ाई,अभी भी भरे पड़े हैंइस देश के भीतरबहुत
Read Moreस्याही तो चेहरे पर फेंक दी,कालिख तो पोत दिए,इसके सिवा तुम कर क्या सकते हो,जातिवादी जलन और कुढ़नगहने रहे हैं
Read Moreजल,जंगल और जमीन केअसली मालिक,आपकी दुर्गति के कारण हैंखुद को सभ्य कहने वालेअसभ्य,बर्बर,नोचकर संपत्ति बनाने वालेवो लोग जोआज भी लगे
Read Moreचरणों में बैठकर भीख मांगने वाले,क्रोध तुम्हें शोभा नहीं देता,तुम एक निश्चित समय तककाम करने वाले होनहीं हो किसी के
Read Moreक्रोध बड़ा नहीं होताबड़े होते हैं संयत आचार, व्यवहार,एक अदने से कलम के आगेझुकती आयी है लाखों तलवार, संयम के
Read Moreचारों तरफ धुआँ उठा है,तुम सिंहासन पर आँख मूँदे बैठे हो,राजकोष खाली पड़ा है,पर चेहरे पर शाही नूर ओढ़े बैठे
Read Moreमेरे नस-नस में समाया हैबाबा साहेब का उपकार,कोई नासमझ जब ना समझे,चाहे करता रहे इंकार,दीये बुझे थे जिन राहों में,वहाँ
Read Moreहां हम छोड़ेंगे,तुमसे डरना छोड़ेंगे,सदियों का जो गुरूरपाल रखे हो मन मेंवो भ्रम भी तोड़ेंगे, डरना हमारी बपौती नहीं था,वो
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