Author: राजेन्द्र लाहिरी

कविता

दोष किसे दूँ?

वही ब्रह्मांड,वही दुनिया,वही मुल्क,वही प्रकृति, वही पर्यावरण,वही आबो-हवा,वही नैतिकता,वही संस्कार,वही जीव-जगत… फिर भी—गिरते स्तर के लिएदोष किसे दूँ? मानव,अब मानव

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