दोष किसे दूँ?
वही ब्रह्मांड,वही दुनिया,वही मुल्क,वही प्रकृति, वही पर्यावरण,वही आबो-हवा,वही नैतिकता,वही संस्कार,वही जीव-जगत… फिर भी—गिरते स्तर के लिएदोष किसे दूँ? मानव,अब मानव
Read Moreवही ब्रह्मांड,वही दुनिया,वही मुल्क,वही प्रकृति, वही पर्यावरण,वही आबो-हवा,वही नैतिकता,वही संस्कार,वही जीव-जगत… फिर भी—गिरते स्तर के लिएदोष किसे दूँ? मानव,अब मानव
Read Moreसंविधान बचाओ रैली मेंबातों और विचारों का आदान प्रदान होने लगा,उत्तेजना दिला सबके मन मेंअराजकता का बीज बोने लगा,खूब होने
Read Moreजमीन के चंद टुकड़ों पर कब्जा करकेसमझ रहे हो खुद को मालिक इस जहां का,लटके पड़े हैं बड़े बड़े गोले
Read Moreआपमें सुशीलता है या नखरो नाज,आपके मुंह से निकला चंद अल्फाज,बयां कर जाता है आपका किरदार व अंदाज,आपके रहन सहन
Read Moreकदम खुदबखुद जा रहा है लेके मुझेअनंत खामोशी की ओर,अब नहीं रहा मेरा मुझ पर जोर,शरीर,वक्त,संबंध सभीमुंह फेर ले रहा
Read Moreटूटे हुए आदमी को पूरी तरह तोड़ देना चाहिए,उन्हें वक्त के रहमोकरम पर छोड़ देना चाहिए,कब,क्या,कुछ हो जाये वो अनजान
Read Moreजयंती समारोह के एक कार्यक्रम मेंकड़वे आसवित जल के सुरूर लेकर वो आ गया,सीधे आयोजकों से टकरा गया,बोला बैनर जो
Read More