प्रकृति का अनुपम आंचल
प्रकृति का यह मोहक रूप,लगता है सबसे अनूप,पल-पल रंग बदलती काया,कभी छांव है,कभी है धूप,कल-कल करती नदियों की धार,बहती जाती
Read Moreप्रकृति का यह मोहक रूप,लगता है सबसे अनूप,पल-पल रंग बदलती काया,कभी छांव है,कभी है धूप,कल-कल करती नदियों की धार,बहती जाती
Read Moreपलकों पर नमी है,पर होंठों पर हंसी भारी है,देख ऐ ज़िन्दगी,मेरी मुस्कुराने की कोशिश जारी है,भीतर एक समंदर ग़म का
Read Moreमैं हूं ही इंकलाब तो इंकलाब बनने दे,देख लेना मेरे दिल के दाग कभी और,देखो अगन उदर की अभी उसे
Read Moreचुनावों के समय अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्गों के साथ होने वाले छलावे या राजनीतिक लोकलुभावनवाद के
Read Moreथोड़ा देकर ज्यादा छीन लेते हो,कम रहता है उसे बहुत गिन देते हो,संवैधानिक हक़ को अहसान बताते हो,गाहे-बगाहे इसे हर
Read Moreअंधेरे रास्तों पर जब भरम का जाल होता है,वहां चेतना का हर एक सवाल बेहाल होता है,दुआओं के भरोसे जो
Read Moreवर्तमान समय में जब देश की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, तब एक ऐसी सरकार
Read Moreअब बता भी दे जरा,और क्या चाहती है तू मुझसे,तंग आ चुका हूं तुझसे,विवाहोपरांत मेरी पत्नी,क्लोज नहीं हो पायी उतनी,उतना
Read Moreनियमों की ऐसी आंधी चली,हर दिन नई किताब खुली,कल जो था बिल्कुल जायज़,आज वही बन गया गलती,शिक्षक की पीड़ा कौन
Read Moreसदियों के जुल्मों सितम काहम बदला लेंगे और जरूर लेंगे,मगर वो बदला होगा संवैधानिक तरीकों से,नजीर बने ऐसे लोकतांत्रिक तरीकों
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