ग़ज़ल
देख हर बार तुमको बुलाते रहे।तुम मगर रोज़ हमको सताते रहे।। चाहतें थीं हमारी पुरकशिश तभी।जो कई बार तुमको जताते
Read Moreगुरु ने पढ़ाया हमेंइतना सिखाया हमेंगुरु-ज्ञान बिना यहजीवन अधूरा है। माता पहली गुरु होतीबच्चों का है मल धोतीसारे ही संस्कार
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