कविता – हाँ! मैं उससे प्रेम करता हूँ
मैंने उससे प्रेमइसलिए नहीं कियाकि उसके चेहरे परसौंदर्य का उजास ठहरा था।मैंने प्रेम कियाउस घायल हृदय सेजिसकी पुकारअक्सर शब्दों से
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Read Moreहम इक्कसवी सदी में जी रहे हैं और ये विज्ञान और तकनीक के मायने में एडवांस होने की सदी है।
Read Moreबिहार में जन्मी प्रियंका ओम बहुत कम लिखने के बावजूद एक प्रतिष्ठित लेखिका हैं, वे आज के नारीवादी फैशन से इतर औरत की
Read Moreआजकल एकदम खाली हूँ इतना खाली कि मेरे हिस्से कोई काम ही नहीं बचा, कभी समय मुझ पर हँसता है
Read Moreसीने पर जो चाँद तुम टांक गई थी, वो रफ्ता-रफ्ता बढ़ता जाता है, जैसे मेंरे तुम्हारे बीच पनप रहा एहसास
Read Moreएक लंबे अरसे से करती रही थी वह मिलने की फरमाइश वक़्त टालता रहा था हमारे मिलने को उसने फिर
Read Moreक्या कुछ बदला मेरे होने या न होने से धरती आज भी उसी रफ्तार से घूम रही है चाँद भी
Read Moreमैं बन्द कमरे में खुद को पढ़ रहा हूँगा या कि गर्मी की रात छत पर लेट महसूस रहा हूँगा
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