बचपन के दिन
लौटा दो मुझे मेरे बचपन के वह दिन,बिन चिंता के ही कट जाते सारे दिन।घर में होते थे दादा-दादी, नाना-नानी,गोद
Read Moreलौटा दो मुझे मेरे बचपन के वह दिन,बिन चिंता के ही कट जाते सारे दिन।घर में होते थे दादा-दादी, नाना-नानी,गोद
Read Moreकार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी,सनातन परंपरा में शुभ मानी गई तिथि।इस दिन करें सुख-सौभाग्य की कामना,“तुलसी विवाह” करिए
Read Moreआप अपने ‘दुश्मन’ से कर लीजिए किनारा,इश्क़ में इतना डूब जाइये मिलता हैं सहारा। दुश्मनी को ‘वक़्त’ ना दिया करों
Read Moreकालचक्र सह असंख्य युद्ध संग्राम घटे,सत्य की ज्योत जलाए ‘श्रीराम’ हैं डटे।श्रीराम व रावण के बीच यह युद्ध हुआ,अस्त्र-शस्त्र एवं
Read Moreकालचक्र सह असंख्य युद्ध संग्राम घटे,सत्य की ज्योत जलाए ‘श्रीराम’ हैं डटे।श्रीराम व रावण के बीच यह युद्ध हुआ,अस्त्र-शस्त्र एवं
Read Moreएक समय था जब हाथों में होती किताब,उसे पढ़ने को परिवारजन हो जाते बेताब।वो दादा-दादी,नाना-नानी की अलमारियाँ,किताबों से सजी खूब
Read Moreराष्ट्रभाषा यानि आमजन की भाषा,हिंदी ही करेगी यह पूरी अभिलाषा।आम बोल-चाल में सब होता साझा,अपन-तूपन, आएला-जाएला वाचा।न कोई झिझक हो
Read Moreमाता व पिता का सुखद अहसास,अपने ‘बच्चों’ के लिए होता खास।बहुत ज्यादा उम्मीदें होता आभास,भविष्य के लिए चिंता होती आस।वह
Read Moreअपनों से ही किया करते हैं वो शिकवा,हमें ना पता उनको किस बात है गिला। ना जाने कब से चल
Read More