ऐ वतन ऐ वतन ऐ वतन…
ऐ वतन ऐ वतन ऐ वतन, ऐ वतन ऐ वतन ऐ वतन। तेरी पावन जमीं को नमन, तेरी पावन जमीं
Read Moreऐ वतन ऐ वतन ऐ वतन, ऐ वतन ऐ वतन ऐ वतन। तेरी पावन जमीं को नमन, तेरी पावन जमीं
Read Moreअगर दो पंख बेटी को छुएगी आसमां इक दिन कहेगा ये जहां सारा इसी की दासतां इक दिन भरेगी कल्पना
Read Moreजानता हूँ बहारों का मौसम नही वो अभी वो नही हम अभी हम नही मुश्किलें तो बहुत है मेरी राह
Read Moreबिता रहे क्यूँ व्यर्थ ही, चिंता में दिन रात। सभी चिता पर जायगें, केवल खाली हाथ॥ भाग रहा दिन रात
Read Moreदंगल में फिर सामने, कुर्सी के बलवीर छोड रहे है देखिये, नित वाणी के तीर नित वाणी के तीर, गिराते
Read Moreआपका आशीष मुझको मिल रहा है दौर लेखन का तभी तो चल रहा है जानता हूँ आप ही का है
Read Moreटूट रहे है मानवता से, पल पल मानवता के नाते। जीवन पल पल बीत रहा है, आँसू पीते और मुस्काते॥
Read Moreकिरणों से होने लगा, सिन्दूरी आकाश। तम का निश्चित जानिये, होना सकल विनाश॥ पंछी चहचाने लगे, कलरव है चहुँ ओर।
Read Moreलाख होगीं कोशिशें ईमान को मत बेचना आदमीयत की यही पहचान को मत बेचना थालियों में आपकी रूखे निबाले ही
Read Moreदिन पलता ढलता रहता है, काल चक्र चलता रहता है। कभी अँधेरे कभी उजाले, खेल यही चलता रहता है॥ चट्टानों
Read More