टुकडे कागज के हुए
टुकडे कागज के हुए, देखो सारे नोट काले धन पर हो गयी,सचमुच गहरी चोट सचमुच गहरी चोट, मची है मारा
Read Moreटुकडे कागज के हुए, देखो सारे नोट काले धन पर हो गयी,सचमुच गहरी चोट सचमुच गहरी चोट, मची है मारा
Read Moreजीवन के कोरे काग़ज पर कोई गीत ग़ज़ल लिखता हूँ। कम होती साँसे लिखता हूँ बीत रहा पल पल लिखता
Read Moreहमारी ज़िन्दगी को ज़िन्दगानी की ज़रूरत है। रखे पहचान जो कायम निशानी की ज़रूरत है॥ कभी सर्दी कभी गर्मी कभी
Read Moreसात जनम तक साथ निभाने का वादा क्यूँ तोड गये। जीवन के अन्जान सफ़र में साथ भला क्यूँ छोड गये॥
Read Moreजुर्म तेरी इंतिहा बाकी अगर है। ये ज़िगर तैयार सारी उम्र भर है॥ ले लिया हँसकर दिया है जिसने जितना।
Read Moreफिर वही नापाक हरकत फिर मिटी इंसानियत नाम पर आखिर धरम के कब तलक ये वहशियत किस धरम ने दी
Read Moreजिन्दगी भर बस यही नादाँनियाँ करता रहा। आदमी रिश्तो में भी बेईमानियाँ करता रहा॥ जान कर भी सच को उसने
Read Moreरोको अब यह अत्याचार काटे पेड हजार हजार खंडित धरती घटता पानी और प्रदूषित हुई बयार मानव कुछ तो सोच
Read Moreमुहब्बत है मेरा पैगाम मुहब्बत लिखना मेरा काम॥ धडकता हूँ धडकन बनकर मैं सबके दिल में रहता हूँ समझता हूँ
Read Moreइरादे फौलादी है मुट्ठी में तूफान रखते है गगन से ऊँची अपनी हस्ती है सम्मान रखते है बहेगा खून का
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