मंच हुए साहित्य के, गठजोड़ी सरकार
मंच हुए साहित्य के, गठजोड़ी सरकार,सभी बाँटकर ले रहे, पुरस्कार हर बार॥ कला नहीं अब माप है, संबंधों का जाल,योग्यता
Read Moreमंच हुए साहित्य के, गठजोड़ी सरकार,सभी बाँटकर ले रहे, पुरस्कार हर बार॥ कला नहीं अब माप है, संबंधों का जाल,योग्यता
Read Moreजर्जर कश्ती हो गई, अंधे खेवनहार,खतरे में ‘सौरभ’ दिखे, जाना सागर पार॥ लहरों का प्रहार है, उठता बारंबार,डगमग करती नाव
Read Moreभारत में आरक्षण पर बहस कोई नई नहीं है, लेकिन समय-समय पर यह मुद्दा नई परिस्थितियों और घटनाओं के कारण
Read Moreस्याही, कलम, दवात से, सजने थे जो हाथ।कूड़ा-करकट बीनते, नाप रहे फुटपाथ।। जिन आँखों में स्वप्न थे, पढ़ने के अरमान।धूल
Read More“रुकने वालों का इतिहास नहीं होता। एक देश–एक पाठ्यक्रम… शिक्षा के नाम पर लूट का विरोध जारी रहना चाहिए।” यह
Read Moreकर्ज गरीबों का घटा, कहे भले सरकार।सौरभ के खाते रही, बाक़ी वही उधार॥ कागज़ पर समृद्धि लिखी, सूना हर बाज़ार।चूल्हे
Read Moreजिन्हें पहुँचाया शिखर तक, हमने थामे हाथ।वही आज समझा रहे, हमको अपनी बात॥ हमसे सीखी राह थी, चलना हरदम साथ।वही
Read Moreआधुनिक युग में युद्ध की प्रकृति ने पारंपरिक सीमाओं को पूरी तरह पार कर लिया है। अब यह केवल टैंकों,
Read Moreहो ममता की नींव पर, घर का पक्का रंग।मगर दरारें जब पड़ें, बिखरे रिश्तों संग।। रिश्तों की दीवार पर, लगे
Read Moreआज तुम्हारे ढोल से, गूँज रहा आकाश।बदलेगी सरकार कल, होगा पर्दाफाश।। झूठे वादे गढ़ रहे, कर- कर मीठी बात।जनता सब
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