छूट गए संस्कार
धन आया घर-द्वार पर, बदले सब व्यवहार।नए अमीरी रंग में, छूट गए संस्कार॥ अपनापन जब से गया, भूले अपने लोग।अहंकार
Read Moreधन आया घर-द्वार पर, बदले सब व्यवहार।नए अमीरी रंग में, छूट गए संस्कार॥ अपनापन जब से गया, भूले अपने लोग।अहंकार
Read Moreदृष्टि बदलते ही खुला, जीवन का विस्तार।मन ही बाँधे देह को, मन ही दे उद्धार॥ तारे दूर नहीं कभी, दूरी
Read Moreडिजिटल युग में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूरी तरह बदल गई है। आज के दौर में लगभग सभी लोगों के पास
Read Moreघर-आँगन में गूँजती, बच्चों की किलकार।हँसी-खुशी के संग सजे, जीवन का संसार॥ गेंद, खिलौने, साइकिलें, सपनों की उड़ान।छोटे-छोटे खेल में,
Read Moreघर आँगन की छाँव है, जीवन का विश्वास।ईंटों से बढ़कर सदा, रिश्तों भरी सुवास॥ दीवारों में कैद हैं, बचपन के
Read Moreलोकतंत्र में जवाबदेही का सबसे अधिक आग्रह सत्ता और पद पर बैठे लोगों से किया जाता है। किसी मंत्री के
Read Moreदूध नहाए हैं सभी, फिर क्यों बिगड़े हाल?जो बोया सो काटते, फिर क्यों करे बवाल॥ सत्य छोड़कर चल दिए, छल
Read Moreभारत में प्रतियोगी परीक्षाएं केवल रोजगार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि करोड़ों युवाओं के सपनों, परिवारों की उम्मीदों और सामाजिक
Read Moreरेंग रहे जिस ढंग से, बिल से निकले साँप।जागा सारा देश तब, लिया समय पर भाँप॥ छल-प्रपंच की ओट में,
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