कुदरत का संदेश
कुदरत का रूठना भी ज़रूरी था,इंसान का घमंड टूटना भी ज़रूरी था।हर कोई खुद को खुदा समझ बैठा,उस वहम का
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Read More“तकनीक के युग में शिक्षक : ज्ञान ही नहीं, जीवन-दृष्टि के भी निर्माता” आज शिक्षा का स्वरूप तीव्र गति से
Read Moreजीएसटी दरों में कटौती जनता के लिए राहत का संकेत है, लेकिन बार-बार बदलते तर्क सरकार की नीतियों पर सवाल
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Read More“जनता और कर्मचारियों की एक पेंशन ही जीवनभर का सहारा, पर नेताओं के लिए अनेक पेंशन और असीमित सुविधाएँ –
Read Moreनूर तिमिर को जो करें, बांटे सच्चा ज्ञान !मिट्टी को जीवंत करें, गुरुवर वो भगवान !! भरें प्रतिभा, योग्यता, बुनता
Read Moreमखमल की झुर्रियाँ,वक्त की स्याही से लिखी,हर सिलवट में बसती हैं,अनकही दास्तानों की छवि। ये उम्र की नहीं,सिर्फ बीते लम्हों
Read Moreखटीक समाज ही नहीं, आज की बदलती दुनिया में उनकी शिक्षाएँ समाज को दिशा देने वाला प्रकाशस्तंभ हैं। संत दुर्बलनाथ
Read Moreबरसात की बूंदें बरसीं बेइंतहा,नदियाँ बनीं लहरों का कहर सदा।खेतों की हरियाली डूब गई पानी में,सपनों की फसल बह गई
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