लघु उपन्यास: रघुवंशी भरत (कड़ी 5)
उस समय तक संध्या घिर आयी थी, अँधेरा होने को ही था। भरत जी जानते थे कि महाराज दशरथ इस
Read Moreउस समय तक संध्या घिर आयी थी, अँधेरा होने को ही था। भरत जी जानते थे कि महाराज दशरथ इस
Read Moreभरत जी ने उसी समय अपने नाना जी के पास जाकर दूतों द्वारा लाया गया सन्देश सुनाया और अयोध्या से
Read Moreअवध से केकय तक का सारा मार्ग उन दूतों द्वारा देखा हुआ था। वे वहाँ पहले भी जा चुके थे।
Read Moreमहाराज दशरथ के शव को सुरक्षित कराने के बाद गुरु वशिष्ठ, मार्कडे, वामदेव, कश्यप, जाबालि आदि ऋषि, सभी मंत्री और
Read Moreमहामंत्री सुमन्त्र से श्री राम के चित्रकूट की ओर निकल जाने का समाचार पाकर महाराज दशरथ श्री राम के वियोग
Read Moreहमारे पौराणिक इतिहास में ‘भरत’ नाम के कम से कम चार महापुरुष हुए हैं- एक, ऋषभदेव या आदिनाथ के पुत्र
Read Moreकुछ दिन पहले मैंने एक लेख प्रस्तुत किया था- ‘आया बुढ़ापा, हाय जवानी’। इस लेख पर अनेक सज्जनों ने सकारात्मक
Read More‘साठा सो पाठा’ यह कहावत बहुत पुरानी है। एक समय था जब यह कहावत सत्य होती थी, क्योंकि इस उम्र
Read More‘जल ही जीवन है’ यह एक पुरानी कहावत है और आज भी शत प्रतिशत सत्य है। जल के बिना हमारा
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