स्मृति के पंख – 20
सन् 1941 में बेटी निर्मला का जन्म हुआ। जैसा कि राज और पृथ्वीराज को छोटी उमर में खिलाता रहा था,
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Read More1995 तक मेरे पास किसी प्रकाशक से कोई पुस्तक लिखने का आदेश नहीं था। बी.पी.बी. प्रकाशन वालों ने जो आदेश
Read Moreपिताजी घर में और मुझसे किसी न किसी बात पर उलझ पड़ते। मैं शांति चाहता था। अब भ्राताजी और भाभीभी
Read Moreमैं दूसरे दिन प्रातः नई दिल्ली स्टेशन पर उतर गया। सांसद श्री वीरेन्द्र सिंह जी मुझे प्लेटफार्म पर ही मिल
Read Moreअनन्तराम के बड़े भाई किशोरी लाल मरदान में सिनेमा मैनेजर थे। उनसे हमने जिकर किया। एक तो उन्होंने वकील कर
Read More1994 में जनवरी माह में मैं एक पुत्री का पिता बना। मेरे एक पुत्र था ही। एक पुत्री और हो
Read Moreकुछ समय बाद सुशीला की मासी के लड़के गंगा विशन की शादी थी। उसने मुझसे कुछ मदद मांगी मैं उसे
Read Moreउन दिनों मैं पुस्तक लेखन पर अधिक ध्यान दे रहा था। घर पर कोई कार्य था नहीं, इसलिए प्रातः जल्दी
Read Moreवारस खान पार्टी का एक भरोसे मंद लड़का था। उसका बड़ा भाई नम्बरदार था और नवाब टोरू का कारिन्दा था।
Read More1993 में ही मैंने एक बार ताइक्वांडो सीखने का निश्चय किया। मेरे कार्यालय के एक कर्मचारी श्री संजीत शेखर का
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