आत्मकथा : मुर्गे की तीसरी टांग (कड़ी 23)
पत्र-मित्रता के माध्यम से मुझे कई घनिष्ट मित्र पाने का सौभाग्य मिला, जिनका जिक्र आगे करूँगा। मेरे व्यक्तित्व के निर्माण
Read Moreपत्र-मित्रता के माध्यम से मुझे कई घनिष्ट मित्र पाने का सौभाग्य मिला, जिनका जिक्र आगे करूँगा। मेरे व्यक्तित्व के निर्माण
Read More6. षड्यंत्र के सूत्रधार राजसी सवारियाँ मार्ग के किनारे निर्मित धर्मशाला के सामने रूकी। अग्रगामी घुड़सवारों ने राजसी स्त्रियों के आने
Read Moreआगरा में अपनी कक्षा के ज्यादातर लड़कों से भी मेरे सम्बन्ध नाम मात्र के थे। उनकी निगाह में मैं गाँव
Read More5. जंग की मंत्रणा एक ऊँचे तख्त पर सुल्तान अलाउद्दीन बैठा है। और उसके सामने कालीन पर उसके मुख्य दरबारी
Read Moreअध्याय-8: मेरे हमदम मेरे दोस्त दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं। दोस्तों की मेहरबानी चाहिए।। मैं उन लोगों को अत्यधिक
Read More4. कामुक सुल्तान का हरम यह दिल्ली के सुल्तान का विशेष हरम था। जहाँ उसने कई बेगमें और रखैले इकट्ठी कर
Read Moreतीसरे और चौथे सत्र में भी हमारा प्रदर्शन काफी अच्छा रहा, लेकिन कल्पना कुछ अंकों से ही प्रथम श्रेणी लाने
Read More3. आन्हिलवाड़ के अंतःपुर में पिता-पुत्री राय कर्ण देव का अपना कक्ष। हाथ में मदिरा से भरा स्वर्ण गिलास। विचारमग्न होकर
Read Moreलेकिन वर्षो की आदत छूटना आसान नहीं है, अतः पहले सेमिस्टर में हमारा रवैया बहुत कुछ लापरवाही का ही रहा।
Read More2. पाटन का रुष्ट ब्राह्मण दिल्ली की गलियों में दिल्ली की राजसी सड़कों पर एक ब्राह्मण धीरे-धीरे चल रहा था।
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