कुण्डलिया छंद
अंतस में नैराश्य का, जब जब पले विकार निंदा रस की गोलियाँ, सहज सरल उपचार सहज सरल उपचार, जगाती उर्जा
Read Moreअंतस में नैराश्य का, जब जब पले विकार निंदा रस की गोलियाँ, सहज सरल उपचार सहज सरल उपचार, जगाती उर्जा
Read Moreछाया हुआ अपनों में मिला ,भक्ति विभोर उत्सव छठी भुला दिखा हर मनवा खोज, ढूढे दिखा संचालिका सूरज दिखे चाहत
Read More-1- बचपन के दो नयन में,ले भविष्य आकार। वर्तमान देखें युवा, जरा अतीताभार।। जरा अतीताभार, देखता बीते कल को। चखता
Read Moreसच नैया खेते रहे ,झूठ नदी पर यार,सच चप्पू करता रहा ,झूठ लहर से प्यार ,झूठ लहर से प्यार ,पवन
Read More-1- गौ माँ!गौ माँ!!कर रहे, सुलभ न चारा घास। मारी-मारी फिर रहीं,गौ माँ आज निराश।। गौ माँ आज निराश, सड़क
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