घांटा और उपवास
चक्की मिल तो सोशल डिस्टिनसिंग के कारण तो जानी नहीं है…. गेहूँ के दर्रे तैयार करने में माँ जुटी हैं,
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Read Moreस्वस्थ तर्क-वितर्क ही मतभेद है, जो होंगे ! पर किसी से बातचीत नहीं करना, मन में गुमार पाल लेना कि
Read Moreआँधी-बारिश-तूफान, फिर भी पंखे झल रहे हैं उसे ! कोरोना कहर में भी आडम्बर ! ×××× वरगद या वर गदगद
Read Moreकम उम्र की युवतियों के संग उम्रदराज पुरुषों के साथ ‘अरेंज’ शादी गलत तो है ही, इस उम्र-अंतराल लिए प्रेम-विवाह
Read Moreकहाँ गए वो दिन जब लोग नींबू, प्याज, मिर्च को काला धागे से पिरोकर घर के आगे, गाड़ी के आगे,
Read Moreरिश्ते नामक तराजू में विश्वास का बटखरा तो है, परंतु उनमें… धोखे का पासंग भी जुड़ा है ! ×××× कुछ
Read Moreधुंध पर कुछ काव्य-रचनाएं 1.चलती रही जिंदगी कभी धुंध के साथ चलती रही जिंदगी, कभी अंधेरे के साये में भी
Read Moreहा हा हा हा हा हा हा हा हा ही ही ही ही ही ही ही ही ही हू हू
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