ग़ज़ल
इश्क़े अंजाम पता क्या होगा।इस मुहब्बत में फ़ना क्या होगा।। कुछ भी मुमकिन हो तो कैसे आखिर।फैसला तेरा बता क्या
Read Moreछिद्र ढूँढ़ता ही रहा, सबके सदा समाज।ग्रीवा में निज झाँकने, में लगती है लाज।। औरों पर ही थोपना, आता गलती
Read Moreमोहब्बत में दिल का इख़्तियार कितना है,पूछो न अब कि हमको ख़ुमार कितना है। वो जो क़रीब होकर भी कभी
Read Moreइश्क चाहतहीन होगा क्या करेगी दिल्लगी,जुर्म ये संगीन होगा क्या करेगी दिल्लगी।रोज प्रेमी प्रेमिका साथी बदल लेते यहां,मन हवस में
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