ग़ज़ल
एक सरकार नव बनाते हैंरोज़ दरबार वो सजाते हैं राज वैभव बड़ा दिखाते हैंरोज़ दरबार में बुलाते हैं राम को
Read Moreराह निहारूँ मैं साजन की, अबकी सावन मेंइत उत बरसो बदरा जाकर, अबकी सावन में। बहुत दिनों के बाद सजन,
Read Moreहाल दिल का छुपाना कठिन काम है।दिल से दिल को मिलाना कठिन काम है।। दर्द की धूप में हँस के
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