इश्क़ हो जायेगा मुझसे मैं न कहता था
दिसंबर की ये सर्दी है मैं न कहता था,आ जाओ न क़रीब मैं न कहता था,नज़र को अपनी नज़र से
Read Moreदिसंबर की ये सर्दी है मैं न कहता था,आ जाओ न क़रीब मैं न कहता था,नज़र को अपनी नज़र से
Read Moreकरते दिल पर राज पिता थे।घर भर के सरताज पिता थे।। सारे घर के जीवनदाता।हम सब के तो नाज़ पिता
Read Moreआए माहज़बी मेरे रूबरू कोई तो गजल मैं लिखूँ,गहराईयों को दिल की मेरे कोई छू ले तो गजल मैं लिखूँ,पी
Read Moreजिन गलियों में बचपन बीता, उनकी बात निराली है,लुकाछिपी आइस पाइस, खेलों की बात निराली है।सारा गाँव था एक हवेली,
Read More