भजन/भावगीत

भजन/भावगीत

हाथ बढ़ा प्रभु मंगल कीजै (दोधक छंद) गणावली

है अति बेकल नैन हमारे।दर्शन को प्रभु राम तुम्हारे।।देकर दर्शन काज सँवारो।नाथ हमें भव से अब तारो।। थाल सजाकर मैं

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भजन/भावगीत

शांति का प्रतीक : माँ चंद्रघंटा

स्वर्णाभ आभा में लिपटी, दिव्य प्रभा की ज्योति हो तुम,सिंहवाहिनी महाशक्ति, सकल ब्रह्मांड की स्रोतस्वरूप तुम।मस्तक पर अर्धचंद्र की रेखा,

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