लघु उपन्यास: रघुवंशी भरत (कड़ी 25)
भरत जी ने फिर कहा- ”भैया! आप अयोध्या लौटकर मेरी माता के कलंक को धो डालिये और पिताजी को भी
Read Moreभरत जी ने फिर कहा- ”भैया! आप अयोध्या लौटकर मेरी माता के कलंक को धो डालिये और पिताजी को भी
Read Moreमैंने मचल कर अपनी भाभी से कहा “भाभी प्लीज मुझे वो आपकी सेंडिल पहनने को दे दो ना, मेरे स्कूल
Read Moreअगले दिन प्रातःकाल सभी भाई और अन्य लोग अपने दैनिक कार्यों से निवृत्त होने के लिए मंदाकिनी नदी के तट
Read Moreइधर सुमि और विपुल अपने अतीत और वर्तमान की उलझनों को सुलझा रहे थे, तो दूसरी तरफ़… शाम के वक़्त
Read Moreइधर कॉलेज से घर पहुँचते ही विपुल बिस्तर पर ढह गया।लेकिन दिमाग में बार-बार वही पल घूम रहा था —जब
Read More“भतीजे की शादी में दस साल बाद गाँव लौटे रमन को अपना गाँव घर पहचान में ही नहीं आ रहा
Read Moreउधर भरत जी का सन्देश पाकर गुरु वशिष्ठ जी के साथ आती हुई तीनों माताएँ श्री राम को देखने की
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