अफ़साना – पुराने रिश्ते
आख़िरकार मासाब का पुराना मकान मिल ही गया।नंदू बड़ी खुशी और हल्की घबराहट के साथ शहर पहुँचा था। उसका बेटा
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Read Moreअपनी कुटी के बाहर यज्ञ वेदी पर बैठे श्री राम की ओर देखते हुए भावविह्वल होकर भरत जी “भैया!” कहते
Read Moreकुछ दिन बाद कॉलेज में कल्चरल प्रोग्राम था और सभी उसकी तैयारियों में बिजी थे। पर सुमि तो अपनी ही
Read Moreरात का पूरा वक़्त सुमि के लिए किसी सपने जैसा बीता था। पिछली शाम की हर एक बात उसके दिल
Read Moreकॉलेज का वातावरण अब पूरी तरह रंग पकड़ने लगा था। विद्यार्थियों ने अपनी-अपनी मंडलियाँ बना ली थीं—कहीं हँसी-ठिठोली के साथ
Read More१८ अगस्त २०२५ का दिन सोमवार, सुबह का समय। बहुत दिनों से सोच रही थी लेकिन समयाभाव के कारण लिख
Read Moreआज भी याद है मुझे एक समय था जब मैं स्कूल जाती थी तब मुझे पांच पैसे मिलते थे अरे
Read Moreभरत जी ने अपनी सेना को पर्वत की तलहटी में ही रोक दिया और जब तक अगला आदेश न मिले,
Read Moreगाँव की पगडंडी पर शाम का अँधेरा उतर रहा था। खेतों से लौटते लोग अपनी-अपनी झोपड़ियों में जा चुके थे।
Read Moreपाँच दिन की छूट्टियाँ बिता कर जब ससुराल पहुँची तो पति घर के सामने स्वागत में खड़े थे। अंदर प्रवेश
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