लघु उपन्यास: रघुवंशी भरत (कड़ी 20)
श्री राम की आज्ञा पाकर लक्ष्मण जी एक ऊँचे शाल वृक्ष पर चढ़ गए और सभी दिशाओं में देखने लगे।
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Read Moreमहेश और सुरेश दोनों सगे भाई, लेकिन दोनों के व्यवहार में जमीन- आसमान का अंतर! यहां तक की एक तो
Read Moreसुबह जब उसने फेसबुक खोला तो सामने आई पोस्ट देखकर हतप्रभ हो गया। ऐसा कैसे हो गया? अभी कल ही
Read Moreडा. सृष्टि अपने पति के कार से मंदिर जा रही थी, मंदिर के रास्ते में
Read Moreश्री राम को चित्रकूट पर्वत बहुत प्रिय लगता था। वहाँ रहते हुए उन्हें अनेक दिन हो गये थे। एक दिन
Read Moreकश्मीर की वादियों में उस सुबह झेलम की धारा कलकल करती बह रही थी। डल झील पर हल्की धुंध तैर
Read Moreलाइब्रेरी की बड़ी-बड़ी खिड़कियों से दोपहर की सुनहरी धूप लंबी लकीरों की तरह अंदर उतरकर किताबों पर बिखर रही थी।
Read Moreट्रेन में हुई उस मुलाक़ात को कई महीने बीत चुके थे, लेकिन समीर चाह कर भी कुछ भूल नहीं पा
Read Moreश्री राम का पता जानकर और मुनि की आज्ञा पाकर भरत जी ने अपनी सेना सहित सभी को चलने का
Read Moreघर के आँगन में पीपल का पुराना पेड़ खामोशी से खड़ा था। उसकी छाँव में खेलते हुए बीते साल जैसे
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