कहानी : मां का घर
‘संजू ओ संजू, देखो तो तुम्हारा लाडला तुम्हारे लिए कितना रो रहा है।’ दिनेश ने ड्राइंग रूम से ही आवाज
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Read Moreकहते हुए ज्वाइस के चेहरे पर बेहद विश्वाश था और वही विश्वाश मेरे चेहरे पर है कि नहीं ये देखने
Read Moreरोहन एक सफल व्यवसायी था, जो अपने काम में इतना व्यस्त था कि उसे अपने जीवन में प्रेम की कमी
Read Moreचिपचिपाती गर्मी यूं ही परेशान कर रही थी । रात का सफर था, संतोष था कि चलो कुछ थोड़ा खा-पीकर
Read Moreआज रिटायर्ड होने पर कॉलेज के हर तरफ आंसू का सैलाब बह रहा था।प्रोफेसर साहब चुपचाप ऑफिस में बैठकर अपने
Read Moreपिछला चुनाव जीतने क के बाद तो टप्पू चौधरी ठीक-ठाक था हमारे प्रधान जी से उसकी बहुत गाढ़ी वाली यानी
Read Moreलंदन की ठंडी शाम! एयरपोर्ट से बाहर आते ही जगमगाती सड़कें! कौशल जी और शुभ्रा जी को पहली बार लगा
Read More‘मॉम से मुझे उसे दिन से नफरत थी और ये नफरत इंतकाम में तब बदल गई जब उन्होंने हमारे सेक्स
Read Moreदिव्या एक प्यारी सी बच्ची, मैटरनिटी लीव के बाद से ही शीला आया ने ही उसकी सारी जिम्मेदारी उठाई ।
Read Moreजुलाई का महीना था दिन के लगभग बारह बजे होंगे। आज मौसम साफ था इसलिए बड़ी तेज धूप थी। वरना
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