कहानी – और कितनी सदियां
पहाड़ों में जीने के लिए पहाड़ होना पड़ता है। जिस तरह पहाड़ धूप- छांव को सहते हुए हमेशा अपनी पीठ
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Read More14 सितंबर यानी हिंदी दिवस आने ही वाला था । हर जगह विद्यालयों, संस्थानों में इसकी तैयारी जोर-शोर से चल
Read Moreज़िंदगी की किताब का पहला पन्ना जब मीरा ने पलटा, तो सबसे पहले वही दो दृश्य उभर आए काली जी
Read Moreगुलमर्र्ग की वादी उस रोज़ सफ़ेद मख़मली चादर में लिपटी थी। देवदार के ऊँचे पेड़ ठंडी हवा में झूम रहे
Read Moreआज सुबह ऑफिस में कुछ अलग ही हलचल थी। चायवाले की आवाज़ धीमी, कंप्यूटर कीबोर्ड की आवाज़ें तेज़, और सभी
Read Moreआज पहली बार धीर को खुशी के साथ पूरी तरह आत्मसंतुष्टि हो रही थी। हो भी क्यों न? आखिर उसने
Read Moreचुटकी भर सिन्दूर की कल्पना मात्र से कभी- कभी किसी की विरान जिन्दगी में किस तरह खुशियों के रंग भर
Read Moreसुबह के छह बज रहे थे। आज रात से ही बारिश हो रही थी। गांव के सरकारी माध्यमिक स्कूल में
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