कहानी – एक आभासी मित्र
“हैलो !” एक अनजान नंबर से महिला की आवाज आई।दीपक थोड़ी -सी घबराहट से जवाब देते हुए कहा,”जी…नमस्ते।”“मैं सुधा बोल
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Read Moreबाबा नौकरी में थे। जब तक कमाते रहे, बेटा-बहू बड़ा अच्छा व्यवहार करते थे, पूछ-पूछकर खाना देते, हाल-चाल पूछते, सब
Read Moreदिया और रिया दोनों सगी बहनें, दोनों हमेशा पूरे घर को खुशी से गुजायान रखते , लेकिन कहा जाता है
Read Moreतेरहवीं की भीड़ अब छँट चुकी थी। जो रिश्तेदार आए थे, वे अब लौट चुके थे। दीवारों पर अब भी
Read Moreकामकाजी स्त्रियाँ सिर्फ ऑफिस से नहीं लौटतीं, बल्कि हर रोज़ एक भूमिका से दूसरी में प्रवेश करती हैं—कर्मचारी से माँ,
Read Moreसावन की रिमझिम बारिश, खेतों की हरियाली, पीपल के पेड़ पर पड़े झूले, और औरतों के गीतों की गूंज —
Read Moreयूनिवर्सिटी के दिनों में वे दोनों साथ पढ़ते थे। दोस्ती धीरे-धीरे मोहब्बत में बदल गई और दोनों ने शादी कर
Read Moreज्वाइस की कही बात ने मुझे किस कदर राहत पहुंचाई थी ये लफ़्ज़ों में बयां करना मुमकिन नहीं था। करवट
Read Moreकोख में किसी बच्चे की पहली चीख, बाहर आने के बाद की नहीं होती। वह तो भीतर ही कहीं, सिसकती,
Read More“दादी सा, मेरे साथ रसोई घर में आईए ना। मुझे मिठाई बनाना नहीं आता है। राखीपूनम मनाने बाईसा आयेंगे। घर
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