यादों का पन्ना – एक लघु उपन्यास
ज़िंदगी की किताब का पहला पन्ना जब मीरा ने पलटा, तो सबसे पहले वही दो दृश्य उभर आए काली जी
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Read Moreगुलमर्र्ग की वादी उस रोज़ सफ़ेद मख़मली चादर में लिपटी थी। देवदार के ऊँचे पेड़ ठंडी हवा में झूम रहे
Read Moreआज सुबह ऑफिस में कुछ अलग ही हलचल थी। चायवाले की आवाज़ धीमी, कंप्यूटर कीबोर्ड की आवाज़ें तेज़, और सभी
Read Moreआज पहली बार धीर को खुशी के साथ पूरी तरह आत्मसंतुष्टि हो रही थी। हो भी क्यों न? आखिर उसने
Read Moreचुटकी भर सिन्दूर की कल्पना मात्र से कभी- कभी किसी की विरान जिन्दगी में किस तरह खुशियों के रंग भर
Read Moreसुबह के छह बज रहे थे। आज रात से ही बारिश हो रही थी। गांव के सरकारी माध्यमिक स्कूल में
Read More‘संजू ओ संजू, देखो तो तुम्हारा लाडला तुम्हारे लिए कितना रो रहा है।’ दिनेश ने ड्राइंग रूम से ही आवाज
Read Moreकहते हुए ज्वाइस के चेहरे पर बेहद विश्वाश था और वही विश्वाश मेरे चेहरे पर है कि नहीं ये देखने
Read Moreरोहन एक सफल व्यवसायी था, जो अपने काम में इतना व्यस्त था कि उसे अपने जीवन में प्रेम की कमी
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