नई चेतना भाग — १३
चौधरी रामलाल की जीप कच्ची पगडंडी से होती हुयी शहर को जानेवाली मुख्य सड़क पर पहुंचकर तूफानी गति से शहर
Read Moreचौधरी रामलाल की जीप कच्ची पगडंडी से होती हुयी शहर को जानेवाली मुख्य सड़क पर पहुंचकर तूफानी गति से शहर
Read Moreअमर के सर से रक्त की धार बह निकली । उसकी आँखों के आगे अँधेरा छाने लगा लेकिन हिम्मत नहीं
Read Moreधनिया अमर के कदमों से लिपटी बस रोये जा रही थी और अमर ! अमर की अवस्था तो उसे देखते
Read Moreअमर स्टेशन से निकल कर शीघ्र ही चौराहे पर पहुँच गया । चार रास्ते चार दिशाओं की तरफ जा रहे
Read Moreबच्चों को कुछ भी याद रहे या न रहे, पर वे अपना बर्थ-डे तो कभी भी भूलते ही नही
Read Moreअमर रात के उस घने अँधेरे में आगे बढ़ता जा रहा था । चलते चलते सड़क पर वह रिक्शा या
Read Moreनारायण की बातों से अमर को थोड़ी राहत महसूस हुयी । वैसे ही जैसे डूबते को तिनके का सहारा मिल
Read Moreबहुत दिनों से देवम और उसकी मम्मी की इच्छा सोमनाथ-दर्शन की हो रही थी। पर कभी तो देवम के पापा
Read Moreअमर पसीने से लथपथ हो चुका था । उसके कदम अब डगमगा रहे थे । हिम्मत जवाब दे रही थी
Read Moreजिस दिन बच्चों को पढ़ना न पड़े और मौज-मस्ती, सैर-सपाटा करने का मौका मिले, उस दिन से अच्छा दिन
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