लघु उपन्यास – षड्यन्त्र (कड़ी 5)
जिन दिनों महामंत्री विदुर राजकुमार युधिष्ठिर को युवराज पद के लिए गोपनीय रूप से तैयार कर रहे थे, तो दुर्योधन
Read Moreजिन दिनों महामंत्री विदुर राजकुमार युधिष्ठिर को युवराज पद के लिए गोपनीय रूप से तैयार कर रहे थे, तो दुर्योधन
Read Moreयुधिष्ठिर पहले ही समझ रहे थे कि अभी कुछ न कुछ अवश्य शेष रह गया है, जिसके लिए मुझे बुलाया
Read Moreअपने निवास पर पहुँचने के बाद महामंत्री विदुर ने राजकुमार युधिष्ठिर को बुलावा भेज दिया। संदेश पाकर युधिष्ठिर तत्काल वहाँ
Read Moreअब समय आ गया था कि ज्येष्ठ राजकुमार युधिष्ठिर का युवराज पद पर अभिषेक कर दिया जाये, ताकि अधिकांश राज
Read Moreगुरु द्रोणाचार्य के दीक्षान्त समारोह की चर्चा पूरे हस्तिनापुर में हो रही थी। कौरव और पांडव राजकुमारों ने अपने कला-कौशल
Read More2019 ने खुशियाँ दी, तो संताप भी ! 2020 सचमुच में विष-विष का ट्वेंटी-ट्वेंटी (20 20) साबित हो रहा, किन्तु
Read Moreसाधना को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुए लगभग एक महीने का समय हो चला था । जीता जागता खिलौना पाकर
Read Moreधूल भरी सड़क में गड्ढों के बीच राह तलाशते हुए जमनादास की कार ने जब सुजानपुर में प्रवेश किया सूर्य
Read Moreरामू काका के मुँह से सुजानपुर और फिर मास्टर सुनते ही जमनादास अधीरता से बंगले के मुख्य दरवाजे की तरफ
Read Moreपरबतिया के जाने के बाद साधना के होठों पर आई हुई मुस्कान ने एक बार फिर खामोशी की चादर ओढ़
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