कुण्डलिया छंद
सुंदर था आँगन सजा, घर-घर महके फूल। खोई माटी की महक, उडती है अब धूल।। उडती है अब धूल, बंद
Read Moreसुंदर था आँगन सजा, घर-घर महके फूल। खोई माटी की महक, उडती है अब धूल।। उडती है अब धूल, बंद
Read Moreअनुभव से परिपक्वता, काम काज का ज्ञान। हटते पथ अवरोध भी, मिले जीत सम्मान।। मिले जीत सम्मान, भाग्य हो उजला
Read Moreशीत ऋतु चली आई, कलियां ले अंगडाई, मनमीता सोहनी, सृष्टि हरषाई।। अलबेली मनहर, मन मोहिनी सुंदर, रंगोली फूलों की सजी,
Read Moreभारत माँ के लाल हैं, सक्षम, चौकस वीर। राष्ट्र हित रक्षण करे, सजग शूर रणधीर।। सजग शूर रणधीर, प्राण न्यौछावर
Read Moreलालू, पप्पू, तेजस्वी, रबड़ी को है बेलअक्खा पाटलिपुत्र यह, देख रहा है खेलदेख रहा है खेल, नहीं हैं नेक इरादेसीढ़ी
Read Moreपानी में रहकर करे, अगर मगर से बैरशशि थरूर बतलाइए,कब तक उसकी खैरकब तक उसकी खैर, वंशवादी हरकाराबर्रे का घोसला,
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