दोहा छंद मुक्तक
गुरुवर के आशीष से, खिलता जीवन बाग। सप्त सुरों के साज से, गूँजे मधुरिम राग। ज्ञान रुपी संजीवनी, शिक्षा करे
Read Moreगुरुवर के आशीष से, खिलता जीवन बाग। सप्त सुरों के साज से, गूँजे मधुरिम राग। ज्ञान रुपी संजीवनी, शिक्षा करे
Read Moreधरती पर चंदा, बरसाता है प्यार। तारों से सजता, जगमग ये संसार। दमक रहें जुगनू, अँधियारा मिटाते– मनभावन छमछम, पायल
Read Moreमाफी मांगा वह पुनः, रागा जिसका नामझूठ झूठ बस झूठ ही, बकना जिसका कामबकना जिसका काम,शरम ना इसको आएबहुरुपिए से
Read Moreजलते हैं हमसे, देख हमें चहकते। लोगों की फितरत, खुशी देख बिगडते।। मुस्कुराते जब हम, क्यों जलता हैं जिया। परम
Read Moreआदत आप सुधारिए, मानो मेरी बात।क्यों तुमको अच्छा लगे, खाते रहना लात।।खाते रहना लात, कसम खाए हो बैठे।जानें कैसा दंभ,
Read Moreदेखो कैसा हो गया, बगदीदी का हालसत्ता गई, पार्टी टूटी, होता रोज बवालहोता रोज बवाल, चले गये सभी विधायकसांसद भी
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