रूप घनाक्षरी छंद
चहकेगा उपवन, महकेगा मधुबन, रात के बाद ही दिन, आएगा निश्चित जान।। मुरझाया चाहे बाग, फूलों में था अनुराग, सखा
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Read Moreज्ञानी ऋषि मुनि हैं बडे, लेखन ललित प्रभास। विद्या दानी की कलम, भरती ज्ञान उजास।। भरती ज्ञान उजास, जिंदगी संवर
Read Moreवोट उसी को दीजिए, जिसके दिल में रामउसे न देना जो करें पग-पग पर कोहरामपग-पग पर कोहराम, किए जीभर हंगामाले
Read Moreपानी-हुक्का बंद कर, रोको बंदरगाहजल प्रवाह को रोक दो, तभी मिटेगी डाहतभी मिटेगी डाह,दिए हो जो गलियारारोक सभी निर्यात,खतम कर
Read Moreरंग रंग में उमंग, हैं सुवासिनी तरंग, आभ सुंदरी सुरेख, सृष्टि रूप साधिए।। पेड़ पौध वृक्ष ठाँव, मीत प्रेम नेह
Read Moreरहें नशे से दूर, विनाशी ये घातक भी। लूटे धन अनमोल, शांति का हैं नाशक भी।। मिटता घर परिवार, रोग
Read Moreमाया को जग पूजता, वैभव का गुणगान। रिश्ते फीके से लगे, निर्धन का अपमान।। निर्धन का अपमान, लड़े भाई-भाई से।
Read Moreशक्ति को पहचानिए, खूब कौशल पाइए, दुम क्यों यूँ दबाते हो, ज्ञानामृत पीजिए।। पीछे-पीछे आये कोई, शरारती आतताई, डटकर हो धुलाई,
Read Moreथाली पुष्पों से भरी, मीठी मिश्री भोग। श्रद्धा से पूजा करें, भक्ति भाव शुभ योग।। भक्ति भाव शुभ योग, भाग्य
Read Moreछोडो पाॅलीथीन का, करना अब उपयोग। धरती को बंजर करे, फैलाएं यह रोग।। फैलाएं यह रोग, छुपा बैरी जहरीला। दूषित
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