घनाक्षरी
बाल वृद्ध राख भान, हाथ थाम ले सुजान, ढूँढते अधीर नैन, प्रेम भाव चाहते।। भक्ति शक्ति रूप देव, छाँव ठाँव
Read Moreममता तेरी चाल पर, सारी दुनिया दंगफूट-फूटकर रो रहा, गिरगिट वाला रंगगिरगिट वाला रंग, लगें पप्पू घाटे मेंटीपू,चारा चोर, केजरी
Read Moreखिले-खिले हो पुष्प, धर्म अनुरागी मन में। सत्य शील सत्कर्म, भाव हो शुभ उपवन में।। महके चहके बाग, छाँव हो
Read Moreदान धर्म श्रेष्ठ कर्म, प्रीत पुष्प नेह मर्म, दंभ द्वेष हो न दर्प, धीर धैर्य धारिए।। रिद्धि सिद्धि बुद्धिमान, आन
Read Moreकुंडलियां छंद उलझे मन की डोर जब, हिय में हो संग्राम। योग ध्यान से ही सखा, मन पर कसे लगाम।।
Read Moreयोगी से ले लीजिए, बुलडोजर श्रीमानसरमा जी से लीजिए,चुन-चुन खनक बयानचुन-चुन खनक बयान,मरें सारे खल-कामीयूसीसी ले आव, लगाए जैसा धामीकह
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