क्षणिका *ब्रजेश गुप्ता 05/09/202505/09/2025 दीदार मकान था छत थी उनको देखने के लिए छत पर कपड़े सुखाने का बहाना था जब से फ्लेट वाले हुए Read More
क्षणिका *ब्रजेश गुप्ता 24/08/202524/08/2025 व्यंग्य अगर ध्यान से देखा और सोचा जाये तो बीड़ी सिगरेट पीना भी एक योग ही है. अनुलोम – विलोम. लम्बा Read More
क्षणिका एस. अमन्दा सरत्चन्द्र 10/08/202510/08/2025 दोस्त एक दिन,दोपहर के समय,कुछ पंक्तियों के बीच बैठा था,तभी एक लड़का दोस्त मिला,जब मैं अपनी सहेलियों के बीच थी। — Read More
क्षणिका *ब्रजेश गुप्ता 03/08/202504/08/2025 क्षणिकायें हाँ में हाँ मिलाता रहा जैसा दिखाया वैसा देखता रहा आज जैसे ही उनके सत्य को असत्य बताया बर्षों का Read More
क्षणिका एस. अमन्दा सरत्चन्द्र 01/08/202501/08/2025 याद हज़ारों लोगों से मिलते हैं,हज़ारों लोग बिछड़ जाते हैं।एक शहर के किनारे,मैं मुस्कुराया था –एक ऐसी याद पर,जो फिर कभी Read More
क्षणिका *अंजु गुप्ता 30/07/202530/07/2025 मौन विरह मौन विरह —1— रंग बदले जब पत्तों ने/ शाखाएँ हुईं उदास/ वृक्ष रहा मौन-निश्चल/ और जड़ें रोईं / … भीतर Read More
क्षणिका *ब्रजेश गुप्ता 04/07/202504/07/2025 आशिनाई ख्वाबों में आते जाते रहिये माना लड़ाई है आपसे फिर भी हमें आशनाई है आपसे रूबरू मुलाक़ात न भी हो Read More
क्षणिका *ब्रजेश गुप्ता 03/07/202504/07/2025 पहाड़ पहाड़ों पर इतना बोझ बढ़ गया सोचने पर मज़बूर हो गए पहाड़ चलो हम ही क्यों न उतर आये नीचे Read More
क्षणिका *ब्रजेश गुप्ता 03/06/202507/06/2025 क्षणकायें जिस चेहरे को चाँद कहा करते थे नूर क्या ढला चाँद के दाग नज़र आने लगे मोहब्बत थी उन्हें चेहरे Read More
क्षणिका *ब्रजेश गुप्ता 01/06/202507/06/2025 भूख जब पेट में भूख लगती है न तो अच्छा बुरा कुछ नहीं दिखता नींद हो जब आँखों में बिछावन देखा Read More