लोकतंत्र
हमको इतराज़ नहींकोई करे देश पर राजइतराज़ है तो बस इतनाराज शाही में थे जो राजा महाराजादेश आज़ाद पर सब
Read Moreसुबह की हंसीओस में नहाया मनखुशियां खिल उठीं हल्की सी धूपआंगन में फैल गईसुकून ही सुकून हवा का झोंकामन से
Read More1.रिश्ते टूटे कहाँ हैं,हम टूटे हैंअहंकार के भार तलेप्रेम दबकर रह गया। 2.घर तो दीवारें हैं,टूटे हैं मनजिन्होंने संवाद छोड़
Read Moreशरद ने कानों में आकर,कह दिया चुपके से गाकर —“पाकर मुझको निखर गई ना?सच कहो, तुम सिहर गई ना?” धवल
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