क्षणिकाएँ- टूटते हुए घरों का सच
1.रिश्ते टूटे कहाँ हैं,हम टूटे हैंअहंकार के भार तलेप्रेम दबकर रह गया। 2.घर तो दीवारें हैं,टूटे हैं मनजिन्होंने संवाद छोड़
Read More1.रिश्ते टूटे कहाँ हैं,हम टूटे हैंअहंकार के भार तलेप्रेम दबकर रह गया। 2.घर तो दीवारें हैं,टूटे हैं मनजिन्होंने संवाद छोड़
Read Moreशरद ने कानों में आकर,कह दिया चुपके से गाकर —“पाकर मुझको निखर गई ना?सच कहो, तुम सिहर गई ना?” धवल
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