ग़ज़ल
नरक की अंतिम जमीं तक गिर चुके हैं आज जोनापने को कह रहे हमसे वो दूरियाँ आकाश की आज हम
Read Moreतस्वीर के रंगों की तरह,यह धरती रंगी अजूबा है।चित्रकार है एक खुदा ही उस के सिवा न दूजा है।हिंदी मुस्लिम
Read Moreनूर से उन के जग में उजाला हुआ।ख़ूबसूरत जहां का नज़ारा हुआ। वो ही होता रहा जो भी कहते रहे,रब
Read Moreजलती सहर सुलगती हुई रात दे गया,बे दर्द एक शख़्स ये सौगात दे गया। इस बार आगे बढ़कर सलाम उसने
Read Moreजी में आता है के अब तर्क मुहब्ब्त कर दूंख़त तेरे सारे ही, हवाओं के हवाले कर दूं तकाज़ा ए
Read Moreबाद मुद्दतों के आज उनसे मुलाकात हुई।दिल जोर से धड़का दर्द उभर फिर आए।फसले गुल फसले बहार उफ मेरे अल्लाह।ये
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