ग़ज़ल
लीक से हटकर चल रही दुनिया।आज नियमों से टल रही दुनिया।। काम कुछ भी नहीं सभी चलते।क्यों न जाने टहल
Read Moreआपका बस मुझे आसरा चाहिए।यार दर मेरे खातिर खुला चाहिए।। कोई चाहे न चाहे मुझे ग़म नहीं।आप जैसी मगर दिलरुबा
Read Moreतकलीफ़ देकर फिर हमदर्दी जताना क्या है,टांग काटकर फिर बैसाखी थमाना क्या है। ज़ख़्म देकर मरहम का दावा भी करते
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