ग़ज़ल
शाम होते ही हंसी ख़्वाबों में उतर जाता हूँ,अपने कदमों की आहटों से ही डर जाता हूँ। तेरे घर के
Read Moreकभी अनदेखा नही करना अपनों सेदिल से दिल का रिश्ता बनाये रखनाबेगाने कभी काम नही आएंगे तुम्हारेअपनों पे हमेशा विश्वास
Read Moreऐसी रार मचाते आयेतहज़ीबें ठुकराते आये कहने भर के सारे रिश्तेएकतरफ़ा ही निभाते आये सबने छोड़ दिया जब हमकोख़ुद को
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