ग़ज़ल
तोड़ कर तारे ज़मीं पर आज ला सकता हूँ मैंतुम इशारा भी करो तो जां लुटा सकता हूँ मैं इब्तिदा-ए-इश्क़
Read Moreकुहू -कुहू कोकिल करे,फागुन मास धमाल।डफ-ढोलक बजने लगे,उड़ने लगा गुलाल।। बरसाने की राधिका, नंदगाँव के श्याम,ब्रजबालाएँ साथ में, नृत्यलीन ब्रज
Read Moreचलो सजनी चले आओ, मलेंगे रंग होली में।चले लेने तुझे आए, उठा लें आज डोली में। यही *फागुन रॅंगीला था,मिली
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