गीतिका/ग़ज़ल अजय अज्ञात 01/07/202627/06/2026 0 Comments ग़ज़ल हों ऋचाएँ वेद की या आयतें कुरआन कीराह दोनों ही दिखाती हैं हमें ईमान की कोई भी हो धर्म, सब Read More
गीतिका/ग़ज़ल अजय अज्ञात 27/06/202627/06/2026 0 Comments ग़ज़ल मेरे बच्चो, किताबें पढ़ने की आदत बना लोपड़ी है सुप्त जो संवेदना उसको जगा लो अंधेरा दूर होगा ज़ेहन से Read More
गीतिका/ग़ज़ल अजय अज्ञात 02/05/202619/04/2026 ग़ज़ल जो सच को भी सच कहने की ज़ुर्रत नहीं करतेहम ऐसे किसी शख़्स की इज़्ज़त नहीं करते दुनिया से उन्हीं Read More
गीतिका/ग़ज़ल अजय अज्ञात 19/04/202619/04/2026 ग़ज़ल दुनिया के साथ रह के भी दुनिया से दूर हैंहम तो अकेले अपनी ही मस्ती में चूर हैं दर्पण! भले Read More
गीतिका/ग़ज़ल अजय अज्ञात 15/04/202615/04/2026 ग़ज़ल गुंचे-सा जब भी रह गया ख़ुद में बिखर के मैंतब अश्क बन के आँख से आया उतर के मैं ज़र्फ़ Read More
गीतिका/ग़ज़ल अजय अज्ञात 03/05/2021 ख़तरे में है हर मुहल्ला हर गली ख़तरे में है आजकल हर आदमी ख़तरे में है घेर रक्खा है ग़मों के झुंड ने Read More
गीतिका/ग़ज़ल अजय अज्ञात 05/10/2020 ग़ज़ल ख़ाली कभी भरा हुआ आधा दिखाई दे चाहे जो जैसा देखना वैसा दिखाई दे जैसे सराब दूर से दर्या दिखाई Read More
गीतिका/ग़ज़ल अजय अज्ञात 22/04/2020 ग़ज़ल जब से हमारी सोच के पैकर बदल गये तब से निशातो क़ैफ़ के मन्ज़र बदल गये अह्सास के वो नर्म Read More
गीतिका/ग़ज़ल अजय अज्ञात 01/01/2020 ग़ज़ल बाग़ में इक भी शजर बाक़ी कहाँ छाया,गुल, बर्गो समर बाक़ी कहाँ इनमें अहसास ए ज़रर बाक़ी कहाँ बाप का Read More
गीतिका/ग़ज़ल अजय अज्ञात 02/08/2019 ग़ज़ल घर घर चूल्हा चौका करती करती सूट सिलाई माँ बच्चों खातिर जोड़ रही है देखो पाई पाई मां बाबूजी की Read More