ग़ज़ल
क़यामत से पहले इशारे मिलेंगे।नसीबों के सब फल तुम्हारे मिलेंगे। अभी और लहरों से लड़ना पड़ेगा,अभी दूर तुमको किनारे मिलेंगे।
Read Moreजैसे भी हो नाम चाहिए।बस हमको आराम चाहिए।। बदनामी की नहीं है चिंता,हमको केवल दाम चाहिए। खेल स्वार्थ का खेल
Read Moreलोग भूल जाते हैं एहसान,जब खड़ा हो जाता है मकान। जिनके दर पे झुके थे हम कभी,आज वही लगते हैं
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