मुक्तक – बढ़ती उम्र के साथ
बढ़ती उम्र के साथ, शौंक बदल जाते हैं,चने खाने की ताकत ख़त्म, अंगूर भाते हैं।सजना सँवरना, स्टाइल के प्रति सजगता,बच्चों
Read Moreबढ़ती उम्र के साथ, शौंक बदल जाते हैं,चने खाने की ताकत ख़त्म, अंगूर भाते हैं।सजना सँवरना, स्टाइल के प्रति सजगता,बच्चों
Read More“एक पृथ्वी-एक स्वास्थ्य हित योग”,भोग भी करो ऐसे जैसे सहज योग,हंसते-गाते रहो, सृष्टि को महकाते रहो,आत्मा महकेगी, तन-मन रहेगा निरोग।
Read Moreयोग दिवस पर क्यों भला, मचा रहे सब शोर।इससे पहले कब भला, खुली आँख थी भोर।। सपना है या सत्य
Read Moreसंत कबीर जन्म जयंती आज है, जिनका नाम कबीर।जन मन कहते प्रेम से, पीर संग रघुवीर।। तीखे उनके बोल थे,
Read Moreरिमझिम बरसें मेघ जी ,मन में भरें फुहार,दादुर झींगुर गा रहे ,खुशियों की झंकार। पावस में गाने लगी ,कोयल सुमधुर
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