हाइकु/सेदोका

हाइकु/सेदोका

अतीत के आँसू

भीगे हैं लम्हे,यादों की चुप खामोशी—बरसात ठहरी। पलकों के कोने,मौन कहानी कहते—वक़्त मुसाफ़िर। टूटे हुए स्वप्न,राख़ में ढूँढे उजाले—सवेरा जागा।

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हाइकु/सेदोका

हर सफलता के पीछे एक अधूरी रात होती है

चांद आधा सोया,सपनों की डोर,अब भी तनहा। नींद से दूर,आँखें जागतीं,मंज़िल पुकारे। क़दम थके हुए,दिल मगर बोले,रुकना मत अब। दीये

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हाइकु/सेदोका

हसरतों से गुजारिश है कि कहीं और जा बसें

थकी सी राहें,सपनों की धूल उड़े,मन खो जाए। चाँदनी फीकी,रात कुछ कहती है,ख़ामोशियाँ भी। मंज़िल न पूछो,कदम थम जाएँ जब,हवा

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